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जिंदगी का हर दिन ईश्वर की डायरी का एक पन्ना है..तरह-तरह के रंग बिखरते हैं इसपे..कभी लाल..पीले..हरे तो कभी काले सफ़ेद...और हर रंग से बन जाती है कविता..कभी खुशियों से झिलमिलाती है कविता ..कभी उमंगो से लहलहाती है..तो कभी उदासी और खालीपन के सारे किस्से बयां कर देती है कविता.. ..हाँ कविता.--मेरे एहसास और जज्बात की कहानी..तो मेरी जिंदगी के हर रंग से रूबरू होने के लिए पढ़ लीजिये ये पंखुरी की "ओस की बूँद"

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Tuesday, 3 March 2015

होली का गीत





होली का गीत सुनने के लिए नीचे  दिए  लिंक पर क्लिक कीजिये

https://soundcloud.com/parul-gupta-2/holi-ka-geet

अ र र र र र र र र ...
हो फागुन रंग रंगीला आया
मस्ती होली की ले आया
तन मन रंगों सा हरसाया
मिलकर धूम मचाये री इइइइ
अ र र र र र र र र ...

हो कोई पिचकारी भर लाओ
सखा को बातों में उलझाओ
जम कर लट्ठ इन पे बरसाओ
कोई बच के ना जाए री इइइइ
अ र र र र र र र र ...

कान्हा जब आये गलियन में
गोपी हो गयी सारी संग में
भागी सब कान्हा ने रंगने
कान्हा मन मुस्काये री इइइइ
अ र र र र र र र र ...

कान्हा ने बंसी ऐसी बजाई
सुध बुध दी सबने बिसराई
कर ली खुद ही खुद की रंगाई
कान्हा ने फाग मचाया री इइइइ
अ र र र र र र र र ...

~~~पारुल'पंखुरी'

2 comments:

  1. होली हो और कान्हा का जिक्र न हो तो अधूरी है होली ...
    मस्त गीत है ... होली की शुभकामनायें ...

    ReplyDelete

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