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जिंदगी का हर दिन ईश्वर की डायरी का एक पन्ना है..तरह-तरह के रंग बिखरते हैं इसपे..कभी लाल..पीले..हरे तो कभी काले सफ़ेद...और हर रंग से बन जाती है कविता..कभी खुशियों से झिलमिलाती है कविता ..कभी उमंगो से लहलहाती है..तो कभी उदासी और खालीपन के सारे किस्से बयां कर देती है कविता.. ..हाँ कविता.--मेरे एहसास और जज्बात की कहानी..तो मेरी जिंदगी के हर रंग से रूबरू होने के लिए पढ़ लीजिये ये पंखुरी की "ओस की बूँद"

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Tuesday, 8 April 2014

शून्य
















शून्य
होता तो है पूरा
किन्तु कितना रिक्त
कोई ओर नहीं
कोई छोर नहीं
अकेला है तो अधूरा
परन्तु
दूसरो के लिए सहारा
शून्य
लगता कितना सिक्त
जब गिरता है
एहसास कराता है
जिन्दा होने का
शून्य .....

-------------------पारुल'पंखुरी'

picture courtesy --s3ntim3nts.blogspot.com via google



3 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीयचर्चा मंच पर ।।

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  2. बहुत खूब .. अपन अपना शून्य हर किसी के पास होता है ... कुछ खास पलों के लिए ...

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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