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जिंदगी का हर दिन ईश्वर की डायरी का एक पन्ना है..तरह-तरह के रंग बिखरते हैं इसपे..कभी लाल..पीले..हरे तो कभी काले सफ़ेद...और हर रंग से बन जाती है कविता..कभी खुशियों से झिलमिलाती है कविता ..कभी उमंगो से लहलहाती है..तो कभी उदासी और खालीपन के सारे किस्से बयां कर देती है कविता.. ..हाँ कविता.--मेरे एहसास और जज्बात की कहानी..तो मेरी जिंदगी के हर रंग से रूबरू होने के लिए पढ़ लीजिये ये पंखुरी की "ओस की बूँद"

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Thursday, 14 March 2013

टुकड़े टुकड़े मन ...



बहता मन महकती पवन ...
आकांशा तारो को छूने की...
वक़्त ने ली एक अंगडाई ..
ओंधे मुह धरती पे आई ..
मिली तन्हाई.. मिली तन्हाई ..

मन टुकडो को समेटा ..
हिम्मत को फिर से लपेटा ..
मोड़ पर कमबख्त इश्क छुपा था ..
एक टुकड़ा उसने चुरा लिया..
रह गई सिर्फ परछाई ..
मिली तन्हाई.. मिली तन्हाई ..

साँसे अभी चल रही थी ..
गिर गिर के संभल रही थी ..
एक मोड़ पर मिल गए धागे ..
समझ के बढ़ गई मै रेशम..
उलझ के रह गया तन मन ...
मन टुकडो ने दम तोड़ दिया ..
आँख में तबसे नमी सी छाई ..
मिली तन्हाई मिली तन्हाई ..-
-----------------------------पारुल'पंखुरी'

17 comments:

  1. तन्हाई कुछ तो कहती है
    अद्भुत भावों संग बहती है
    मन के अनजाने तल में
    ये प्रेमिका बन रहती है
    जीवन के मुश्किल पल में
    ये साथ सदा ही देती है
    तन्हाई कुछ तो कहती है....

    तन्हाई से बेहतर और सच्चा कोई दोस्त नहीं | सुन्दर रचना पारुल | बहुत शानदार अभिव्यक्ति शब्दों की और भावों की | आभार

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  2. साजन हमसे मिले भी लेकिन ऐसे मिले की हाय ,
    जैसे सूखे खेत से बादल बिन बरसे उड़ जाय,,,,,,, (जमालुद्दीन आली )

    बीबी बैठी मायके , होरी नही सुहाय
    साजन मोरे है नही,रंग न मोको भाय..
    .
    उपरोक्त शीर्षक पर आप सभी लोगो की रचनाए आमंत्रित है,,,,,
    जानकारी हेतु ये लिंक देखे : होरी नही सुहाय,

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  3. बढ़िया भाव आदरेया-
    शुभकामनायें-

    आकांक्षा छूने चली, उचक उचक आकाश |
    नखत चकाचक टिमटिमा, उड़ा रहे उपहास-

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  6. कमबख्त इश्क हमेशा अनजाने मोड़ पर ही छुपा मिलता है ।

    भावपूर्ण कविता ,मन को भाने वाली ।

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  7. पी प्रबसे सागर पार मैं रहि पंथ निहार ।
    धार धरी ऊपर धार सखि मैं कवन अधार ॥

    भावार्थ : --
    प्रियतम विदेश में प्रवासित है और मैं आगमन की प्रतीक्षा में हूँ ।
    धारा के ऊपर धारा है, हे ! मित्र, मैं किस के आधार रहूँ ॥

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  8. बैठ भंडिरा चौंक पै सजन सँदेस सुनाए ।
    गोरी घूँघट औंट कै होरी होरी गाए ॥

    भावार्थ : --
    पत्रवाहक चौराहे पर बैठ कर प्रियतम का सन्देश सुना रहा है ।
    और प्रियतमा घूँघट कर होली है! होली है! कह रही है ॥

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  9. ये तन्हाई का आलम कभी कभी डुबो जाता है ...
    इससे बाहर आना जरूरी है ...

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  10. तन्हाई सच्चा साथी है ,धोखा नहीं देती -उत्तम अभिव्यक्ति

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  11. बढ़िया अभिच्यक्ति ...बधाई !

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  12. पारुल......वाह क्या बात है - बहुत नाजुक, बहुत प्यारी रचना- अभिनन्दन-

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  13. बहुत प्यार कोमल और उदास एहसास

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